भलाई

ऐतिहात बरतने में ही भलाई,
तोड़कर (दूरी रखकर) ही निजात पाई।
ऐ खुदा के बंदों,
कद्र कर उसकी रहमत की,
वरना तो,
जन्नत और दोज़ख,
दोनों में ही उसने,
तेरे लिए जगह बनाई।

— डॉ नरेंद्र कुमार कपूर —

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