बचपन की यादें।

वो माँ का लाड, बाबा का प्यार,
बहुत याद आता है।
वो भाई बहन का रूठना मनाना,
बहुत याद आता है।
वो रात की लोरी, माँ की गोद,
बहुत याद आती है।
दादी नानी की कहानियां,
बहुत याद आती हैं।
दादाजी का टॉफ़ी दिलाना,
नानाजी का पार्क में घुमाना,
बहुत याद आता है।
माँ की हंसी, माँ की उदासी, उनकी ख़ुशी, उनका दर्द,
बहुत याद आता है।
बाबा की मुस्कराहट, बाबा का गुस्सा, उनकी चिंता, उनका गर्व,
सब याद आता है।
कहाँ वो बचपन के दिन खो गए, क्यों हम इतने बड़े हो गए?
क्यों वो नादानियों, वो बेफिक्रियां अब मुमकिन नहीं?
ज़िन्दगी की उधेड़बुन में क्यों हम इतने उलझ गए?
एक बार फिर जीना है अपना बचपन मुझे,
इस बार बड़े होने की जल्दी नहीं मुझे।

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