माँ

माँ वो होती है,
जो अपने सब गम भुलाकर मुस्कुराती रहती है,
जो दर्द में भी हँसती, गाती है,
थकी हो फिर भी लोरी सुनाती है।

माँ वो होती है,
जो अपनी महत्वाकांक्षाएं त्यागकर, बच्चों के सपने पूरे करती है,
जो खुद भूखी रहकर भी बच्चों को खाना खिलाती है,
बच्चों की चोट देखकर खुद ही रो पड़ती है ।

“बच्चों की खुशी में मेरी खुशी है”, यह कहके खुश हो जाती है।

माँ वो होती है,
जो हर मुशकिल चुटकी में हल कर देती है।
जो ज़िन्दगी जीना सिखाती है,
सही गलत की पहचान बताती है।

माँ वो होती है,
जो किसी अपेक्षा बिना, निःस्वार्थ प्यार करती है,
दिन रात मेहनत करती है।
बच्चों की हर ज़िद पूरी करती है।

माँ वो होती है,
जिसके लिए बच्चे हमेशा बच्चे रहते हैं,
“भगवान का रूप है माँँ”, यह तो सभी कहते हैं,
पर मेरे लिए तो पहला भगवान माँ ही है,
जिसने मुझे जन्म और जीवन दोनों ही दिया है।

One Comment

  1. Anonymous
    May 10, 2020
    Reply

    Beautiful poem dost ❤️

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